आज राजनीति की जो तस्वीर हमें दिखाई देती है, उसको देखकर चिंता होना स्वाभाविक है। राजनीति देश को किसी दिशा में ले जाने का सबसे बार जारिया है। आज राजनीति गुटों और दलों में बंटी है जिसके कारण उसका वास्तविक वजूद आज़ादी के बासठ साल बाद भी सही रूप में निखर कर नहीं आ सका, यही हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। राजनीति कुछ स्वार्थ की खातिर संकीर्णता और सत्ता लोलुपत्ता के रूप में इस्तेमाल की जा रही है जिसका खामियाजा देश को भुगतना पर रहा है।
राजनीति हमारे देश में एक सही दिशा देने का मध्यम कम, सत्ता के लालच में हर कुछ करने का केन्द्र बन रही है। इसमें कुछेक लोगों को छोड़कर ज्यादातर लोगों को राजनीति किसे कहतें हैं, उसके मायने क्या है और किन उदेश्यों के लिए उसका जन्म हुआ, यह नहीं मालूम। आज राजनीति में सही समझ वालों का अकाल पर गया है। हमारे जनप्रतिनिधि की जमात में बहुत कम ऐसे लोग है जो राजनीति को दिशा देने में कामयाब है, जबकि हालत यह है की जिसे राजनीति के उद्देश्यों और लक्ष्यों के बारे में क-ख-ग मालूम नहीं, वह बाहें उठाकर राजनीति के बारे में हूंकार लगता है। ऐसे लोगो के कारण ही राजनीति में स्वार्थ, धन कमाने, बहुबल हासिल करने के प्रवृति का विकास हुआ है जिसके कारण उसमें गंदगी का आना स्वाभाविक था और इस वजह से वो लोग भी आज परेशान देखे जा सकते हैं जो वास्तव में राजनीति करने लायक है। उन्हें ऐसे लोगों के साथ काम करने में दिक्कत आती देखी जा सकती है।
राजनीति में आने की लिए किसी खास योग्यता या प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसी नेता से जुड़े तो ठीक, नहीं तो बाहुबली और धनबली के साथ थोड़ा दबंगता से बोलना आ गया तो राजनीति में पैर जमाते देर नहीं लगेगी। जिसमें ये हुनर विकसित हो जाता है, वह राजनीति में नए सोपानों को हासिल करने में महारत हासिल कर लेता है। थोडी चालाकी और जुगाड़-बाज़ी का प्रपंच सीख लिया तो फ़िर कहना ही क्या?
राजनीतिज्ञों में मतभेद हैं, इसलिए बड़े और छोटे अफसर उन्हें अच्छे नज़रों से नहीं देखते। सब लोग राजनीतज्ञों को उल्टा-सीधी बोलने से नहीं चूकते। यह प्रसाद उन्हें मुफ्त में ही मिल जाया करता है। अगर देश अच्छे और सलीके से चलाना है तो अच्छे लोगों को राजनीति में रूचि रखनी पड़ेगी, अन्यथा देश, प्रशासन और जनता क्या हाल आज हो चुका है, उसकी अच्छी तस्वीर भविष्य में बन जायेगी ऐसा सोचकर कदम नहीं चले जा सकते।
आज हमें जागना होगा, दूसरों को जगाना होगा, अच्छे राजनीतिज्ञों का होसला मजबूत करना होगा । देश को अच्छा बनाना है तो सब के योगदान की आवश्यकता होती है, केवल किसी को कोसने हमारी जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती।
Thursday, October 29, 2009
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